Wealth & Profession Through Astrology आपका धनागम वा व्यवसाय चुनाव कुण्डली में धन योग और माता लक्ष्मी की कृपा सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलं अर्थः | वृत्ति मूलं अर्थः अर्थ मूलौ धर्मकामौ || आयुः कर्म च वित्तं विद्या निधनमेव च | पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || धनमाजर्य काकुत्स्थ धन मूल मिदं जगत् | अन्तर ना भी जानाति निर्धनस्य मृत्स्य च || जातक के व्यवसायों के प्रकार का निर्णय ग्रहों की स्वरुप, बल आदि पर निर्भर करता है | जो ग्रह अत्यधिक बलवान् होकर लग्न, लग्नेश आदि आजीविका के द्योत्तक भाव पर प्रभाव डालता है | अतः ग्रहों के स्वरुप का ज्ञान आजीविका के निर्णय करने के लिए अत्यावश्यक है | अतः धन ही कमाना हर कार्य का प्रथम उदेश्य रहता है | जातक का व्यवसाय profession सभी आचार्यों वराह मिहिर, पराशर और कई प्रतिष्ठित विद्वानों ने दशम भाव की ओर संकेत किया है | हमारा मत है जिस कुण्डली से जातक का सकल चेहरा मिले उस कुण्...
मैं सुनील नाथ झा, एक ज्योतिषी, अंकशास्त्री, हस्तरेखा विशेषज्ञ, वास्तुकार और व्याख्याता हूं। मैं 1998 से ज्योतिष, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तुकला की शिक्षा और अभ्यास कर रहा हूं | मैंने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य | मैंने वास्तुकला और ज्योतिष नाम से संबंधित दो पुस्तकें लिखी हैं -जिनके नाम "वास्तुरहस्यम्" और " ज्योतिषतत्त्वविमर्श" हैं | मैंने दो पुस्तकों का संपादन किया है - "संस्कृत व्याकर-सारः" और "ललितासहस्रनाम" |