आपका लग्न क्या है - Janiye Aapka Lagn Kya Hai? चन्द्र लग्नं शरीरं स्यात् , लग्नं स्यात् प्राणसंज्ञकम् | ते उमेसंपरिक्ष्यैव सर्व नाडी फलम्समृतम् || कुण्डली मानव जीवन के संचित प्रारब्धों की निधि है जिसमें जातक से सम्बंधित स्वास्थ्य, ज्ञान, धन, कुटुम्ब, सफलता- असफलता, उन्नति- अवन्ती, सुख- दुःख आदि का विचार राशियाँ, भावों और ग्रहों द्वारा विचार किया जाता है | चन्द्र लग्न शरीर है,लग्न प्राण है | वैसे लग्न शरीर, चन्द्र मन और सूर्य लग्न आत्मा या पराक्रम माना जाता है | इन दोनों का सम्यक् विचार करने के बाद ही कुण्डली का फल कहना चाहिए | अतः इन्हें ध्यान में रखकर जिस भाव में सूर्य और चन्द्र हो उनको भी लग्न भाव की तरह समझना चाहिए | भावादी की गणना में भी इन लग्नों को स्थान देना चाहिए तथा इससे भी वे विचार करने चाहिए जो लग्न से किये जाते है | लग्नों और राशियों को सतत परिवर्तित होते रहने से उसके फलों में भी परिवर्त्तन होता रहता है | साथ ही ग्रह भी इन भावों और राशियों को अपने प्रभाव से प्रभावित कर फलों में परिवर्त्तन लाते रहते...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...