प्रश्नाध्याय – प्रश्न कुण्डली (Prashna Kundali): अचूक ज्योतिषीय रहस्य भावैर्विचार्य विषयान् जानीयात् प्राग् बुधस्ततः | बलाऽबलविवेकेन शुभाऽशुभफलं दिशेत् || स्वरुपलक्षणं प्रश्न- कर्तुर्दुःखसुखे तनोः | रत्नाना लाभहानी तु धनस्थानात् विचिन्तयेत् || ज्योतिषशास्त्र पुराण गणकैरादेश इत्युच्यते अर्थात् ज्योतिषशास्त्र ज्ञान का आदेशात्मक शास्त्र है। मानव स्वभाव से ही अत्यंत जिज्ञासु होता है। वह अपने वर्तमान एवं भविष्य से सम्बन्धित प्रश्नों का उत्तर जानना चाहता है तथा उसके समाधान के लिए ज्योतिष की सहायता चाहता है। ✍️ लेखक परिचय: डॉ. सुनील नाथ झा डॉ. सुनील नाथ झा एक प्रख्यात ज्योतिषी, अंकशास्त्री, हस्तरेखा विशेषज्ञ, वास्तुकार और व्याख्याता हैं। वे 1998 से ज्योतिष, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान और वास्तुकला की शिक्षा व अभ्यास कर रहे हैं। डॉ. झा ने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया है। उन्होंने वास्तुकला और ज्योतिष पर "वास्तुरहस्यम्" और ...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...