ज्योतिष और द्वादश भाव फलित - Jyotish Aur Dwadash Bhav Phalit द्वादश भावों में अन्योन्य सम्बन्ध ज्योतिष विद्या अत्यधिक उपादेय विद्या है | ग्रहदशा के दुष्ट फल को भोगने वाले निराश व्यक्ति जातक को आशान्वित भविष्य की घोषणा से अनेक प्रकार के उपद्रवों को सहने के लिए संजीवनी शक्ति प्रदान करता है और सुखी व्यक्ति जातक के भावी जीवन के उत्थान-पतन की घोषणा से वह उसके भविष्य के प्रति निश्चित मार्ग दर्शन कराता है | मानव जीवाणु गर्भस्थ होगा उस समय के सौर मण्डल की छाप से जो जन्म कुंडली बनेगी तदनुसार मनुष्य जातक रुपी जीव किस समय गर्भ से बहिर्भुत होगा | वही सही समय को गर्भागत समय की कुण्डली से ही जातक का भविष्य का शुभाशुभ विचार होना चाहिए;- गर्भाधानं पुसवनं सीमन्तोन्नयनं जातकर्म नामकरणाान्ना प्राशनचौलो पनयनानि चत्वारि वेदव्रतानि इत्यादि | उत्रार्ध पुत्रोत्पत्यर्थमवश्यं संङ्गः कार्यः | इससे स्पष्ट होता है की संस्कृति और संस्कार से युक्त योग्य पुत्र उत्पन्न करना जीवन का परम उद्देश्य होना चाहिए | ज्योतिष शास्त्र की अध्ययन सामग्री ग्रह सञ्चालन और उसका सचराचर प्रकृति पर पड़ने वाले ...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...