हस्त-ज्योतिष - PALMISTRY सामुद्रिकरहस्यम् ज्योतिष विद्या वह दिव्य विज्ञान है जो भूत, वर्त्तमान और भविष्य तीनों कालों को जानने की कला सिखलाता है | उस में से एक “ हस्त-रेखा ” या “ सामुद्रिकरहस्यम् ” भी है मनुष्य में भविष्य जानने की इच्छा होती है I जातक की भविष्य देखेने की भिन्न भिन्न विधायें भिन्न भिन्न देश , काल व सस्कृति के कारण भिन्न भिन्न रूप में परिष्कृत हुई ,परन्तु आज भी मानव सस्कृति-सभ्यता के सामने अनुत्तरित खड़ा है | वह यह है कि भविष्य को जान लेने के बाद क्या भविष्य बदला जा सकता है तो मैं यह कह सकता हूं कि:- भगवान् ! “आत्मा”- को जिस कुल ,जाति और धर्म में भेजते है उसका निर्धारण “गर्भधारण” के समय जो निर्धारित (कुंडली या हस्त में) करते है वैसे ही “शीर्षोदय” के बाद जीवन भर शुभाशुभ भोगना पड़ता है :--- “ आयुः कर्मं च वितं च विद्यानिधन मेव I पंञ्चैतान्यायं सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः II अर्थात् -- इसका अर्थ है कि आपको वर्त्तमान (तात्कालिक) समय कुण्डली या हाथ में सब कुछ निर्धारित कर दिया गया हैं | उसके माध्यम से सारे कार्यक्रम मिल गया है | इस कुंडली य...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...