Kya Aapki Kundli Me Hai Dhan-Lakshami Yog जानिये की क्या आपकी कुंडली में धन लक्ष्मी का योग है ? ज्योतिष में योग शब्द से अभिप्राय ग्रहों के संबन्ध से है , यह सम्बन्ध ग्रहों की युत्ति , दृ्ष्टि संबन्ध् , परिवर्तन तथा अन्य कई कारणों से बन सकता है I जिस प्रकार धर्म में बुद्धि और शरीर का योग , आयुर्वेद में दो या दो से अधिक औषधियों का योग मंगलकारी होता है I ठीक उसी प्रकार ग्रहों का दो जब बुध , गुरु , शुक्र लग्न या चन्द्रमा से षष्ठ , सप्तम और अष्टम भाव में एक साथ या अलग-अलग हो तो अधियोग बनता है अधियोग व्यक्ति को धनवान बनाता है यह शुभ योग है I देवी लक्ष्मी को धन की देवी के रुप में जाना जाता है। धन हमारे जीवन में रख रखाव और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ पैसे होने से कईं ज़्यादा है। इसका अर्थ है ज्ञान , कौशल और प्रतिभा में प्रचुरता। लक्ष्मी वह ऊर्जा है जो व्यक्ति के पूर्ण आध्यात्मिक और भौतिक कल्याण के रुप में प्रकट होती है। अपने १६ रुपों में धन प्रदान करती है , यथा लक्ष्मी से:- ज्ञान , बुद्धि , बल , शौर्य , सौंदर्य , विजय , प्रसिद्धि , महत्वाकांक्षा...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...