आपका लग्न, भावों और राशियों का अद्भुत समन्वय: ज्योतिषीय दृष्टिकोण आपका लग्न , भावों और राशियों के सम्बन्ध है आकाशस्थ भचक्र को द्वादश भावों में बाँट कर प्रत्येक भाग को मेषादि द्वादश राशि माना गया | उन द्वादश राशियों का गुण दोष का विवेचन कर ग्रहों के साथ समन्वय करके उनके अनुसार भावों का स्वामी ग्रहों का निर्देशन किया गया | लग्न भाव यानि जन्म के समय क्रान्ति मण्डल का जो भाग क्षितिज में संलग्न हो वही हो और कोई ;- चन्द्र लग्नं शरीरं स्यात् , लग्नं स्यात् प्राण संज्ञकम् | ते उमेसंपरिक्ष्यैव सर्वं नाड़ी फलम्स्मृतम् || अर्थात् चन्द्र लग्न शरीर है, लग्न प्राण है, सूर्य लग्न आत्मा होता है | सुदर्शन चक्र से परिचय और नवमांश कुण्डली से जीवन जिया जाता जिसका सम्यक विचार करने के बाद ही कुण्डली का फल कहना चाहिए | भावादि की गणना में भी इन लग्नों को स्थान देना चाहिए तथा इससे भी वे विचार करने चाहिए जो लग्न से किये जाते है | उन द्वादश राशियों का गुण दोष का विवेचन कर ग्रहों के साथ समन्वय करके उनके अनुसार भावों का स्वामी ग्रहों का निदर्शन किया गया |...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...