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Swar Shastra Astrology: How Voice & Name Vowels Predict Destiny

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सहज (आत्मा से) साधना: मन की शांति, ग्रहों का प्रभाव और आध्यात्मिक मार्ग

ॐ श्री गणेशाय नमः क्या आपने कभी महसूस किया है कि जीवन की अंतहीन दौड़ और मानसिक तनाव के बीच हमारी आत्मा का वास्तविक स्वरूप कहीं खो गया है? शांति की खोज बाहर नहीं, बल्कि भीतर होती है। इसी गूढ़ रहस्य को उजागर करते हुए, ज्योतिषाचार्य श्री सुनील नाथ झा ने 'सहज (आत्मा से) साधना' के माध्यम से एक ऐसा मार्ग दिखाया है, जो बाहरी आडंबरों से मुक्त है। आइए जानते हैं कि कैसे ज्योतिषशास्त्र और ग्रहीय ऊर्जाओं को समझकर हम अपनी आत्मा की गहराई में उतर सकते हैं। आत्मा की सहज अवस्था: बाहरी आडंबरों से दूर परम ध्यान सहज (आत्मा से) साधना मानव जीवन के लिए सहज साधना सबसे सरल साधना है क्योंकि इसमें बाहरी आडम्बर से कोई लेना देना नही है | आत्मा से चलना, सरल जीवन और नित्य कर्म ही सहज साधना होता है अर्थात् आत्मा के अनुसार चलना- मन के अनुसार नही | क्योंकिः - मन में राग द्वेष, छल-कपट और ग्रहों से जल्दी प्रभावित होता रहता है | ज्योतिषशास्त्र सहज अवस्था बालक- बालिका का १२ वर्ष से पहले मानता है | उसके बाद से छल -कपट, राग -द्वेष जीवन मार्ग में प्रवेश ...

Tripataki Chakra Vedh: त्रिपताकी चक्र वेध से ग्रहों का शुभाशुभ विचार | Dr. Sunil Nath Jha

भारतीय ज्योतिष शास्त्र (Indian Astrology) में जन्म कुंडली के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए कई चक्रों का उपयोग किया जाता है, जिनमें से Tripataki Chakra (त्रिपताकी चक्र) सबसे महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग इसे बोलचाल की भाषा में Tipayi Cycle या Tipai Cycle के नाम से भी खोजते हैं, लेकिन इसका शुद्ध ज्योतिषीय नाम 'त्रिपताकी चक्र' है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Dr. Sunil Nath Jha द्वारा प्रस्तुत यह लेख आपको Tripataki Chakra Vedh की गणना, वेध दोष और ग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव को समझने में मदद करेगा। यदि आप ज्योतिष के मूल आधार को समझना चाहते हैं, तो पहले ज्योतिष शास्त्र का परिचय (Jyotish Shastra) अवश्य पढ़ें। 1. त्रिपताकी चक्र क्या है? (Tripataki Chakra in Hindi) Tripataki Chakra Meaning: यह एक विशेष ज्योतिषीय चार्ट है जिसका उपयोग मुख्य रूप से 'बालारिष्ट' (बच्चों के स्वास्थ्य संकट) और जीवन में आने वाले अचानक संकटों (Vedh) को देखने के लिए किया जाता है। इसमें ग्रहों की एक विशेष ज्यामितीय स्थिति (Geometry) बनाई जाती है जिससे यह पता चल...

कुंडली से जानें कौन सा बिजनेस करें | नौकरी या व्यापार में सफलता कैसे मिले? (Career Astrology)

लेखक: डॉ. एस.एन. झा (Dr. S.N. Jha) | अनुभव: 30+ वर्षों का वैदिक ज्योतिष परामर्श इस लेख में पराशर होरा शास्त्र और भृगु संहिता के आधार पर career prediction by kundli का सबसे सटीक और प्रामाणिक विश्लेषण किया गया है। कुण्डली से व्यवसाय चुनने की पद्धति कर्मेशस्थनवांशराशिदवशात् वृत्ति जगुस्तज्ज्ञाः अर्थात् विद्वानों ने जातक का वृत्ति काम-धन्धे अर्थात् व्यवसाय का विचार दशम भाव का स्वामी जिस नवांश में स्थित हो उस नवांश के स्वामी के अनुरुप या आस-पास कहना चाहिए | जातक के ऊपर किन कुण्डली किन ग्रहों का प्रभाव उसके जीवन स्वभाव, रंग, रुप, कद, व्यावहार, अध्य यन अध्यापन आदि पर रहा है अर्थात् सब से अधिक प्रभावी ग्रह के स्वरुप के आधार पर व्यवसाय का निर्धारित होता है यद्यपि दशम भाव कर्म भाव है यद्यपि यह रुपया कमाने के कर्मों का द्योत्तक नही है | अच्छे बुरे, यज्ञीय - अयज्ञीय कर्मों का द्योत्तक है | किस स्थान से दशम भाव लिया जाय और फिर वहां पर स्थित ग्रह का बलाबल देखा जाय ➖ वि...