ॐ श्री गणेशाय नमः क्या आपने कभी महसूस किया है कि जीवन की अंतहीन दौड़ और मानसिक तनाव के बीच हमारी आत्मा का वास्तविक स्वरूप कहीं खो गया है? शांति की खोज बाहर नहीं, बल्कि भीतर होती है। इसी गूढ़ रहस्य को उजागर करते हुए, ज्योतिषाचार्य श्री सुनील नाथ झा ने 'सहज (आत्मा से) साधना' के माध्यम से एक ऐसा मार्ग दिखाया है, जो बाहरी आडंबरों से मुक्त है। आइए जानते हैं कि कैसे ज्योतिषशास्त्र और ग्रहीय ऊर्जाओं को समझकर हम अपनी आत्मा की गहराई में उतर सकते हैं। आत्मा की सहज अवस्था: बाहरी आडंबरों से दूर परम ध्यान सहज (आत्मा से) साधना मानव जीवन के लिए सहज साधना सबसे सरल साधना है क्योंकि इसमें बाहरी आडम्बर से कोई लेना देना नही है | आत्मा से चलना, सरल जीवन और नित्य कर्म ही सहज साधना होता है अर्थात् आत्मा के अनुसार चलना- मन के अनुसार नही | क्योंकिः - मन में राग द्वेष, छल-कपट और ग्रहों से जल्दी प्रभावित होता रहता है | ज्योतिषशास्त्र सहज अवस्था बालक- बालिका का १२ वर्ष से पहले मानता है | उसके बाद से छल -कपट, राग -द्वेष जीवन मार्ग में प्रवेश ...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...