सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Vivah Vichar (Marriage Astrology): Complete Guide to 36 Gun Milan

हाल की पोस्ट

Swar Shastra Astrology: How Voice & Name Vowels Predict Destiny

Swar Shastra in Astrology: Can Your Voice Predict Destiny? Swar Shastra (Swar Vigyan) is a highly specialized predictive branch of Vedic astrology that interprets the phonetic vibrations and core vowels associated with an individual's name. While mainstream astrology relies heavily on planetary geometries within a birth chart, traditional seers developed Swar Shastra on the premise that the specific sounds we resonate with—and are identified by—have a profound correlation with our life cycles. According to traditional texts and practitioners like Dr. Sunil Nath Jha, analyzing the Panch Swar (five core vowels) and dynamic Swar Chakras provides a classical framework to anticipate periods of growth, stagnation, and vulnerability. This article breaks down the methodology of voice and name astrology, explaining how ancient scholars connected human phonetics to cosmic timing. Swar Shastra provides a framework for decoding life cycles throu...

सहज (आत्मा से) साधना: मन की शांति, ग्रहों का प्रभाव और आध्यात्मिक मार्ग

ॐ श्री गणेशाय नमः क्या आपने कभी महसूस किया है कि जीवन की अंतहीन दौड़ और मानसिक तनाव के बीच हमारी आत्मा का वास्तविक स्वरूप कहीं खो गया है? शांति की खोज बाहर नहीं, बल्कि भीतर होती है। इसी गूढ़ रहस्य को उजागर करते हुए, ज्योतिषाचार्य श्री सुनील नाथ झा ने 'सहज (आत्मा से) साधना' के माध्यम से एक ऐसा मार्ग दिखाया है, जो बाहरी आडंबरों से मुक्त है। आइए जानते हैं कि कैसे ज्योतिषशास्त्र और ग्रहीय ऊर्जाओं को समझकर हम अपनी आत्मा की गहराई में उतर सकते हैं। आत्मा की सहज अवस्था: बाहरी आडंबरों से दूर परम ध्यान सहज (आत्मा से) साधना मानव जीवन के लिए सहज साधना सबसे सरल साधना है क्योंकि इसमें बाहरी आडम्बर से कोई लेना देना नही है | आत्मा से चलना, सरल जीवन और नित्य कर्म ही सहज साधना होता है अर्थात् आत्मा के अनुसार चलना- मन के अनुसार नही | क्योंकिः - मन में राग द्वेष, छल-कपट और ग्रहों से जल्दी प्रभावित होता रहता है | ज्योतिषशास्त्र सहज अवस्था बालक- बालिका का १२ वर्ष से पहले मानता है | उसके बाद से छल -कपट, राग -द्वेष जीवन मार्ग में प्रवेश ...

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)

हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)   हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च |  पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात्  आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है |                     हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है-  अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :-  1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2  फिट ...

Tripataki Chakra Vedh: त्रिपताकी चक्र वेध से ग्रहों का शुभाशुभ विचार | Dr. Sunil Nath Jha

भारतीय ज्योतिष शास्त्र (Indian Astrology) में जन्म कुंडली के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए कई चक्रों का उपयोग किया जाता है, जिनमें से Tripataki Chakra (त्रिपताकी चक्र) सबसे महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग इसे बोलचाल की भाषा में Tipayi Cycle या Tipai Cycle के नाम से भी खोजते हैं, लेकिन इसका शुद्ध ज्योतिषीय नाम 'त्रिपताकी चक्र' है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Dr. Sunil Nath Jha द्वारा प्रस्तुत यह लेख आपको Tripataki Chakra Vedh की गणना, वेध दोष और ग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव को समझने में मदद करेगा। यदि आप ज्योतिष के मूल आधार को समझना चाहते हैं, तो पहले ज्योतिष शास्त्र का परिचय (Jyotish Shastra) अवश्य पढ़ें। 1. त्रिपताकी चक्र क्या है? (Tripataki Chakra in Hindi) Tripataki Chakra Meaning: यह एक विशेष ज्योतिषीय चार्ट है जिसका उपयोग मुख्य रूप से 'बालारिष्ट' (बच्चों के स्वास्थ्य संकट) और जीवन में आने वाले अचानक संकटों (Vedh) को देखने के लिए किया जाता है। इसमें ग्रहों की एक विशेष ज्यामितीय स्थिति (Geometry) बनाई जाती है जिससे यह पता चल...

10 प्राण और उपप्राण (The 10 Pranas): शरीर में स्थान, कार्य और रहस्य | Dhananjay Pran & Vayu

शरीर के 10 प्राण: स्थान, कार्य और रहस्य (The 10 Pranas) By Astrologer Dr. Sunil Nath Jha (Vedic & Medical Astrologer) उत्तर तथा पश्चिम दिशा के मध्य कोण को वायव्य (North-West) कहते है। इस दिशा का स्वामी या देवता 'वायुदेव' है। वायु पञ्च होते है:- प्राण, अपान, समान, व्यान, और उदान। हर एक मनुष्य के जीवन के लिए पाँचों में एक प्राण परम आवश्यकता होता है। पांचो का शरीर में रहने का स्थान अलग-अलग जगह पर होता है। हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है, उसका नाम ‘प्राण’ (Vital Life Force) है। शरीर में हाथ-पाँव आदि कर्मेन्द्रियां, नेत्र-श्रोत्र आदि ज्ञानेंद्रियाँ तथा अन्य सब अवयव-अंग इस प्राण से ही शक्ति पाकर समस्त कार्यों को करते है। Quick Guide: 5 मुख्य प्राणों के स्थान (Summary Table) प्राण का नाम (Name) स्थान (Location) मुख्य कार्य (Function) 1. प्राण (Prana) नासिका से हृदय तक (Chest area) ...