ज्योतिष और षड्दर्शन ज्योतिष एक ब्रह्म विद्या है जो अनेकों रूप में विद्यमान है | भारतीय ज्योतिष की विश्लेषणात्मक परिधि का विस्तार इतना है कि उसके अंतर्गत सभी सांसारिक पदार्थोँ का विश्लेषण आ ही जाता है | सभी दर्शनों का प्रतिपादन विषय एक ही है जो सार्वदेशिक और सार्वकालिक है | रस्ते भिन्न होने से भी प्रतिपाद्य विषय एक रहने पर शब्द मात्र की विभिन्नता होने पर वस्तुगत विभिन्नता नहीं होती | इसलिए सभी दर्शनों में शब्द की विभिन्नता है पर उनके लक्ष्य एक है | यथा जल प्रवाहिनी नदियों का जल प्रवाह चाहे नर्मदा मार्ग से या गंगा मार्ग से या अन्य किसी नदी मार्ग से अपने लक्ष्य रुपी समुद्र तक पहुंँचना है तो इससे किसी को आपत्ति क्यों होगी, इसी प्रकार ज्ञानी लोगों को भी लक्ष्यरुपी ईश्वर की प्राप्ति में मार्ग भिन्नता के लिए कोई विसंवाद नहीं होना चाहिए | लक्ष्य को देखना चाहिए कि वह किस मार्ग से आसानी से प्राप्त होता है अर्थात यह देखना होगा कि किस नदी का प्रवाह जल को समुद्र तक सही तक ले जाता है | इसी प्रकार सभी दर्शन शास्त्र एक ही लक्ष्य को बताते है और अपने अपने मार्ग द्वारा निजी लक्ष्य रुप तक पहुँच जाते है |...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...