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ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य! श्रीमद भगवद गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग (Bhagavad Gita Ch 15)

Kundali Milan & Vivah Vichar: 36 Gun, Graha Maitri Chart & गुण मिलान सारणी

Kundali Milan & Vivah Vichar 2026: 36 Gun, Graha Maitri Chart & गुण मिलान सारणी कुण्डली से विवाह विचार By Astrologer Dr. S. N. Jha SEO Overview & Quick Guide: Welcome to the most authentic and classical guide on Kundali Milan and Vivah Vichar . In this detailed analysis by Astrologer Dr. S.N. Jha, you will find the complete 36 Gun Milan Chart (अष्टकूट मिलान सारणी) , the highly searched Graha Maitri Chart , the deep meaning behind the Yoni Milan Chart , and the exact truth about Nadi Dosh . Scroll down for downloadable chart photos and tables. Caption: Kundali Milan & Vivah Vichar Master Graphic - 36 Gun, Nadi Dosh & Remedies | कुंडली से विवाह विचार अष्ट कूट और अमांगलिक दोष (खराब कुंडली) निवारण – मांगलिक का अर्थ होता है शुभ। भारतीय संस्कृति और सामाजिक संस्कारों से विवाह संपन्न होने पर वैवाहिक जीवन 90% तक सफल व्यतीत होता है। केवल गणितीय पद्धति (गुण मिलान) से विवाह करने पर आपका वैवाहिक जीवन तभी सफल होगा, जब अष्टकूट मिलान का...

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हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)

हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)   हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च |  पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात्  आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है |                     हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है-  अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :-  1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2  फिट ...

10 प्राण और उपप्राण (The 10 Pranas): शरीर में स्थान, कार्य और रहस्य | Dhananjay Pran & Vayu

शरीर के 10 प्राण: स्थान, कार्य और रहस्य (The 10 Pranas) By Astrologer Dr. Sunil Nath Jha (Vedic & Medical Astrologer) उत्तर तथा पश्चिम दिशा के मध्य कोण को वायव्य (North-West) कहते है। इस दिशा का स्वामी या देवता 'वायुदेव' है। वायु पञ्च होते है:- प्राण, अपान, समान, व्यान, और उदान। हर एक मनुष्य के जीवन के लिए पाँचों में एक प्राण परम आवश्यकता होता है। पांचो का शरीर में रहने का स्थान अलग-अलग जगह पर होता है। हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है, उसका नाम ‘प्राण’ (Vital Life Force) है। शरीर में हाथ-पाँव आदि कर्मेन्द्रियां, नेत्र-श्रोत्र आदि ज्ञानेंद्रियाँ तथा अन्य सब अवयव-अंग इस प्राण से ही शक्ति पाकर समस्त कार्यों को करते है। Quick Guide: 5 मुख्य प्राणों के स्थान (Summary Table) प्राण का नाम (Name) स्थान (Location) मुख्य कार्य (Function) 1. प्राण (Prana) नासिका से हृदय तक (Chest area) ...

Tripataki Chakra Vedh: त्रिपताकी चक्र वेध से ग्रहों का शुभाशुभ विचार | Dr. Sunil Nath Jha

भारतीय ज्योतिष शास्त्र (Indian Astrology) में जन्म कुंडली के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए कई चक्रों का उपयोग किया जाता है, जिनमें से Tripataki Chakra (त्रिपताकी चक्र) सबसे महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग इसे बोलचाल की भाषा में Tipayi Cycle या Tipai Cycle के नाम से भी खोजते हैं, लेकिन इसका शुद्ध ज्योतिषीय नाम 'त्रिपताकी चक्र' है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Dr. Sunil Nath Jha द्वारा प्रस्तुत यह लेख आपको Tripataki Chakra Vedh की गणना, वेध दोष और ग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव को समझने में मदद करेगा। यदि आप ज्योतिष के मूल आधार को समझना चाहते हैं, तो पहले ज्योतिष शास्त्र का परिचय (Jyotish Shastra) अवश्य पढ़ें। 1. त्रिपताकी चक्र क्या है? (Tripataki Chakra in Hindi) Tripataki Chakra Meaning: यह एक विशेष ज्योतिषीय चार्ट है जिसका उपयोग मुख्य रूप से 'बालारिष्ट' (बच्चों के स्वास्थ्य संकट) और जीवन में आने वाले अचानक संकटों (Vedh) को देखने के लिए किया जाता है। इसमें ग्रहों की एक विशेष ज्यामितीय स्थिति (Geometry) बनाई जाती है जिससे यह पता चल...