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नवग्रहों की महादशा का सटीक फलादेश: जानें कौन सा ग्रह चमकाएगा आपकी किस्मत? | गोचर में

ज्योतिषशास्त्र और एक दृष्टि: फलित ज्योतिष, कर्म, भाग्य और ग्रहों का प्रभाव

ज्योतिषशास्त्र और एक दृष्टी - Jyotishshastra Ek Drishti ज्योतिषशास्त्र भारतीय मनीषियों के त्याग , तपस्या ,जनित और बुद्धि की देंन है | ज्योतिषशास्त्र दो भागो में हमें ज्ञान प्राप्त करता है इसका का ग णित भाग्य विश्व के मानव के मस्तिष्क की वैज्ञानिक उन्नति की जड़ है और फलित भाग्य उसका फल-फूल है| ज्योतिष अपने विविध भेदों के माध्यम से समाज की सेवा करता आया है| इसने अपने गणित ज्ञान से विश्व को उद्बोधित किया और आकाश में रहने वाले ग्रहों और तारो के बिम्बों,किरणों और प्रभावों का अध्ययन किया | हमारे महर्षियों ने ब्रह्माण्ड रूपी भचक्र में विचरने वाले गगनेचरो को कुंडली के भचक्र के रूप में साक्षातकार कर उसके मध्याम से जनजीवन पर पड़ने वाले उनके प्रभावो का विस्श्लेषण किया | जिसे “फलित ज्योतिष” कहा जाता है |विश्व के शुभाशुभ फलो को दर्शाने वाला शास्त्र “ज्योतिषशास्त्र ” कहलाता है ¬– "प्रयोजनम तु जगतः शुभाशुभ निरुपणं |" अर्थात-👉“प्राणियों या वस्तुओ पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है फलतः उसके शुभाशुभो पर प्रभावित करता है दूसरा मत है की प्राणियों के पूरब जन्म कृत शुभाशुभ कार्यो से ग्रह आबध होता है ...

Astrology and the Path of Human Life - ज्योतिष और मानव जीवन मार्ग

 ज्योतिष और मानव जीवन मार्ग  मानव मस्तिष्क सतत्  कार्यशील, जाग्रत और प्रगतिशील रहता है, वह नित्य नई नई भावनाओं और कल्पनाओं को जन्म देता रहता है तथा उसको मूर्त्त रुप देने के लिए सतत् प्रयत्नशील रहता है | कर्म हम उसे कहते है जो कर्म वर्त्तमान क्षण तक किया गया है | चाहे वह इस जन्म में किया गया हो या पूर्व जन्मों में ये सभी कर्म संचित कहलाता है | जन्म जन्मान्तरों के संचित कर्मों को एक साथ भोगना संभव नहीं है | अतः उन्हें एक एक कर भोगना पड़ता है, क्योंकि इनसे मिलने वाले फल परस्पर विरोधी होते है | उन संचित कर्मों में से जितने कर्मों के फल का पहले भोगना प्रारम्भ होता है, उसे प्रारब्ध कहते है | ध्यान देने योग्य बात यह है कि जन्म जन्मान्तरों के संचित कर्मों को प्रारब्ध नहों कहते, अपितु उनसे जितने भाग का फल भोगना प्रारब्ध हुआ है, उसे ही प्रारब्ध कहते है | देश, काल, जाति  के अनुसार सबों की अपनी संस्कृति होती है, जिसके अनुसार मानव अपना जीवन संचालित रखता है | सदियों से आयी हुई प्रत्येक देश, काल आदि की अपनी रीति- रिवाज, रहन- सहन, संस्कार, पूजा-पाठ आदि जिन नियमित तौर तरीकों से होते ह...

आपका राशि फल क्या है ? - By Astrologer Dr Sunil Nath Jha

आपका राशि फल क्या है ? - By Astrologer Dr Sunil Nath Jha यद्व्यक्तात्मको विष्णुः कालरूपो जनार्दनः | तस्याङ्गानि निबोध त्वं क्रमान्मेषादिराशयः || मेषो वृषश्च मिथुनः कर्क सिंह कुमारिकाः |  तुलालिचापमकराः कुम्भमीनौ यथाक्रमम् || रविश्चद्रो  धरापुत्रः  सोमपुत्रो  वृहस्पतिः | भृगुः शनैश्चरो  राहुः केतुश्चैते ग्रहाः नव || जन्म कालिक चन्द्र जिस राशि में रहता है उसको चन्द्र  राशि कहते है | जब चन्द्र राशि का स्वामी और चन्द्रमा शुभ और बली होते है तो नीचे लिखे हुए जन्म राशि फल भी ठीक ठीक मिलेगा | जातक का राशि या मन किस प्रकार के होते है |  काल स्वरूपं जो अव्यक्तात्मा जनार्दन विष्णुः है | उन्हीं के अंग मेषादि राशियाँ है | वे द्वादश राशियाँ मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ तथा मीन है सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, वृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु ये नव ग्रह है |  ;- वृत्ताताम्रदृगुष्णशाकलधुभुक्  क्षिप्रप्रसादोऽटनः  कामी दुर्बलजानुरस्थिरधनः शुगेऽङ्गनावल्लभः |  सेवाज्ञः कुनखी व्रणांंकितशिरा मानी सहोत्थाग्रजः  श...

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हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)

हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)   हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च |  पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात्  आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है |                     हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है-  अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :-  1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2  फिट ...

10 प्राण और उपप्राण (The 10 Pranas): शरीर में स्थान, कार्य और रहस्य | Dhananjay Pran & Vayu

शरीर के 10 प्राण: स्थान, कार्य और रहस्य (The 10 Pranas) By Astrologer Dr. Sunil Nath Jha (Vedic & Medical Astrologer) उत्तर तथा पश्चिम दिशा के मध्य कोण को वायव्य (North-West) कहते है। इस दिशा का स्वामी या देवता 'वायुदेव' है। वायु पञ्च होते है:- प्राण, अपान, समान, व्यान, और उदान। हर एक मनुष्य के जीवन के लिए पाँचों में एक प्राण परम आवश्यकता होता है। पांचो का शरीर में रहने का स्थान अलग-अलग जगह पर होता है। हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है, उसका नाम ‘प्राण’ (Vital Life Force) है। शरीर में हाथ-पाँव आदि कर्मेन्द्रियां, नेत्र-श्रोत्र आदि ज्ञानेंद्रियाँ तथा अन्य सब अवयव-अंग इस प्राण से ही शक्ति पाकर समस्त कार्यों को करते है। Quick Guide: 5 मुख्य प्राणों के स्थान (Summary Table) प्राण का नाम (Name) स्थान (Location) मुख्य कार्य (Function) 1. प्राण (Prana) नासिका से हृदय तक (Chest area) ...

36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri

36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri कुण्डली मिलान और विवाह विचार में 36 गुणों की अष्टकूट मिलान सारणी, ग्रह मैत्री, योनि मिलान, वश्य, नाड़ी दोष और भकूट का विचार किया जाता है। यहाँ आपको 36 गुण मिलान सारणी और प्रमुख मिलान चार्ट एक ही स्थान पर मिलेंगे। ⬇ Download 36 Gun Milan PDF & Charts विवाह विचार के प्रमुख चार्ट (Quick Reference Tables) 1. सम्पूर्ण योनि मिलान चार्ट (Full 14 Yoni Table) योनि (Yoni) नक्षत्र (Nakshatras) शत्रु योनि (Enemy - Avoid) अश्व (Horse) अश्विनी, शतभिषा महिष (Buffalo) गज (Elephant) भरणी, रेवती सिंह (Lion) मेष (Ram) कृत्तिका, पुष्य वानर (Monkey) सर्प (Snake) रोहिणी, मृगशिरा नकुल (Mongoose) श्वान (Dog) मूल, आर्द्रा मृग (Deer) मार्जार (Cat) अश्लेषा, पुनर्वसु मूषक (Rat) मूषक (Rat) मघा, पूर्वा फाल्गुनी मार्जार (Cat) गौ (Cow) उत्तरा फाल्गुनी...