आपका वास्तु विचार - Janiye Apna Vastu Vichaar Vastushashtra Ke Bare Me Janiye मानश्चक्षुषोर्यत्र संतोषो जयते भूवि | तत्र कार्यगृहं सर्वैरितिगर्गादि सम्पतम् || जिस मनुष्य को जहाँ की भूमि पसन्द हो वहन घर बनाकर बसे | गर्ग समकालीन आचार्यों ने इसे स्वीकार किये होगे | वास्तु भूमि की लम्बाई उत्तर-दक्षिण होनी चाहिए अथवा चौकोर भूमि में वास करना चाहिए | जिससे सकून मनः शान्ति बना रहता है | पूर्व-पश्चिम लम्बाई में अशुभ फल मनः अशान्ति रहता हैं | लम्बाई- चौड़ाई के योग में से भाग देने पर शेष १में दाता, २में भूपति, ३मे नपुंसक, ४में चोरी, ५ में विचक्षण उत्तम, ६ में भोगी, ७ में धनाढ्य, ८में दरिद्र और ९ में कुबेर मण्डलेश होता है | पूर्व-पश्चिम लम्बा मकान सूर्य - वेधी होता है, उत्तर- दक्षिण लंबा मकान चन्द्र - वेधी होता है | चन्द्र वेधी और चौकोर घर परम शुभ होता है धन और कुल की वृद्धि होती है | परन्तु सूर्य -वेधी मध्यम होता है इधर जलाशय होनी चाहिए | बाग़-बगीचा दोनों में शुभ रहता है | मन्दिर देवालय में इनका विचार नहीं होता है | ब्राह्मण वर्ण पूर्व...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...