ज्योतिष, सृष्टि और उसका लय न जानामि मुक्तं लयं वा कदाचित् लंकानगर्यामुद्याच्चभानोस्तस्यैव बारे प्रथमं बभूब मधोः सितार्छेर्दिनमास वर्ष युगादिकानां युगपत्प्रवृतिः || सृष्टि के आदि में जब काल और व्यक्तिजनक भग्रहादि का प्रादुर्भाव होता है तब उन दोनों का दिन, मास, युगादि का एकावली प्रारंभ होता है | ज्योतिष शास्त्र काल गणना का शास्त्र है | काल का उत्पादक भचक्र है और उसमें स्थित सूर्यादि ग्रह है | बिना उसके काल की उत्पत्ति संभव नहीं है | आगमोक्त सृष्टि चक्र की पर्यालोचना से काल से अनादि और अनन्त में इस चर-अचर संसार का आविर्भाव और तिरोभाव दिग्, देश और काल के वश से होते है,जो गति विद्या के प्रमाण पथ के आधार पर स्पष्ट जाना जाता है | लय का शाब्दिक अर्थ -चित्त की वृत्तियों का सब ओर से हटकर एक ओर प्रवृत्त होना | सृष्टि और लय शब्द का अर्थ होता है कि किसी निश्चित समय में वस्तुओं का उत्पन्न होना और कुछ समय के बाद उस का अवसान होना | क्योंकि सृष्टि गत पदार्थों का आविर्भाव एवं तिरोभाव एक निश्चित समय में होता रहता है | ...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...