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Vivah Vichar (Marriage Astrology): Complete Guide to 36 Gun Milan

श्री हनुमान चालीसा संस्कृतानुवादः - Hanuman Chalisa Sanskrit Transation

  श्री हनुमान चालीसा संस्कृतानुवादः - Hanuman Chalisa Sanskrit Transation अथ श्री हनुमान   श्री हनुमान चालीसा संस्कृतानुवादः   श्री गुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि I  बरनऊं रघुवर बिमल जसु जो दायकु फल चारि II१  II हृद्दर्पणं नीरजपादयोश्च गुरोः पवित्रं रजसेति कृत्वा I फलप्रदायी यदयं च सर्वम् रामस्य पूतञ्च यशो वदामि II  बुद्धिहीन तनु जानिकै सुमिरौं पवन-कुमार I  बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु क्लेश विकार II२II स्मरामि तुभ्यम् पवनस्य पुत्रम् बलेन रिक्तो मतिहीनदासः I दूरीकरोतु सकलं च दुःखम् विद्यां बलं बुद्धिमपि प्रयच्छ II जय हनुमान ज्ञान गुणसागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर I जयतु हनुमद्देवो ज्ञानाब्धिश्च गुणागरः जयतु वानरेशश्च त्रिषु लोकेषु कीर्तिमान् I राम दूत अतुलित बल धामाअन्जनि पुत्र पवनसुत नामा II३II दूतः कोशलराजस्य शक्तिमांश्च न तत्समः I अञ्जना जननी यस्य देवो वायुः पिता स्वयम् II  महावीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी I हे वज्राङ्ग महावीर त्वमेव च सुविक्रमः कुत्सितबुद्धिशत्रुस्त्वम् सुबुद्धेः प्रतिपालकः I कंचन बरन बिराज सुब...

Numerology Kya Hoti Hai? Janiye Numerology Ke Baare Mein? अंक विज्ञान - Numerology

Numerology Kya Hoti Hai? Janiye Numerology Ke Baare Mein?  अंक विज्ञान - Numerology Numerology Kya Hoti Hai? Janiye Numerology Ke Baare Mein?         भारतीय ज्योतिष में मूल रुप से ९ ग्रहों को ही प्रधानता दी गई है, अतः अंक विद्या में भी प्रथम ९ अंको की ही प्रधानता मानी जाती है | इसके पश्चात् के अंक सयुक्त संख्या के रुप में माने जाते है | एक से नौ तक के अंक मूलांक कहलाते है | मूलांक १, २, ३, और ४ इसको वृहद् मूलांक तथा शेष ५, ६, ७, ८ और ९ पांच मूलान्को को लघु मूलांक कहते है | अंक विज्ञान विश्व का सर्वाधिक प्राचीन एवं नवीनतम विज्ञानं है | प्राचीन इसलिए कि भारतीयों ऋषियों विज्ञानविदों एवं भविष्यवेताओ को इसका ज्ञान था और नवीनतम इसलिए की जिस रुप में आजकल इसका प्रयोग किया जा रहा है उसके अनुसार यह प्राचीन पद्धति से हटकर अपनी एक नवीन सत्ता के साथ आगे बढ़ रहा है | इसका अध्ययन करने के लिए मस्तिष्क का संतुलन परमावश्यक है | आप इसमें जातक के सुख-दुःख और तीनो काल को समेटे हुए है वैसे सारे शास्त्र(ज्योतिषशास्त्र, रमलशास्त्र,टेरोकार्ड, सामुद्रिकशास्त्र या अंक...

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हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)

हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)   हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च |  पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात्  आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है |                     हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है-  अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :-  1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2  फिट ...

Tripataki Chakra Vedh: त्रिपताकी चक्र वेध से ग्रहों का शुभाशुभ विचार | Dr. Sunil Nath Jha

भारतीय ज्योतिष शास्त्र (Indian Astrology) में जन्म कुंडली के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए कई चक्रों का उपयोग किया जाता है, जिनमें से Tripataki Chakra (त्रिपताकी चक्र) सबसे महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग इसे बोलचाल की भाषा में Tipayi Cycle या Tipai Cycle के नाम से भी खोजते हैं, लेकिन इसका शुद्ध ज्योतिषीय नाम 'त्रिपताकी चक्र' है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Dr. Sunil Nath Jha द्वारा प्रस्तुत यह लेख आपको Tripataki Chakra Vedh की गणना, वेध दोष और ग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव को समझने में मदद करेगा। यदि आप ज्योतिष के मूल आधार को समझना चाहते हैं, तो पहले ज्योतिष शास्त्र का परिचय (Jyotish Shastra) अवश्य पढ़ें। 1. त्रिपताकी चक्र क्या है? (Tripataki Chakra in Hindi) Tripataki Chakra Meaning: यह एक विशेष ज्योतिषीय चार्ट है जिसका उपयोग मुख्य रूप से 'बालारिष्ट' (बच्चों के स्वास्थ्य संकट) और जीवन में आने वाले अचानक संकटों (Vedh) को देखने के लिए किया जाता है। इसमें ग्रहों की एक विशेष ज्यामितीय स्थिति (Geometry) बनाई जाती है जिससे यह पता चल...

10 प्राण और उपप्राण (The 10 Pranas): शरीर में स्थान, कार्य और रहस्य | Dhananjay Pran & Vayu

शरीर के 10 प्राण: स्थान, कार्य और रहस्य (The 10 Pranas) By Astrologer Dr. Sunil Nath Jha (Vedic & Medical Astrologer) उत्तर तथा पश्चिम दिशा के मध्य कोण को वायव्य (North-West) कहते है। इस दिशा का स्वामी या देवता 'वायुदेव' है। वायु पञ्च होते है:- प्राण, अपान, समान, व्यान, और उदान। हर एक मनुष्य के जीवन के लिए पाँचों में एक प्राण परम आवश्यकता होता है। पांचो का शरीर में रहने का स्थान अलग-अलग जगह पर होता है। हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है, उसका नाम ‘प्राण’ (Vital Life Force) है। शरीर में हाथ-पाँव आदि कर्मेन्द्रियां, नेत्र-श्रोत्र आदि ज्ञानेंद्रियाँ तथा अन्य सब अवयव-अंग इस प्राण से ही शक्ति पाकर समस्त कार्यों को करते है। Quick Guide: 5 मुख्य प्राणों के स्थान (Summary Table) प्राण का नाम (Name) स्थान (Location) मुख्य कार्य (Function) 1. प्राण (Prana) नासिका से हृदय तक (Chest area) ...