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36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri

कुण्डली में षड्वर्ग विचार - Kundli Me Shadvarg Vichaar | Astrologer Dr S. N. Jha

कुण्डली में षड्वर्ग विचार - Kundli Me Shadvarg Vichaar कुण्डली और षड्वर्ग चक्र का प्रतीकात्मक चित्र ग्रहं होरा च द्रेष्काणो नवांशो द्वादशांशकः | त्रिंशांशश्चेति षड्वर्गास्ते सौम्य ग्रहजाः शुभाः || समस्त ब्रह्माण्ड गोलाकार रुप में विद्यमान है | जिसमें ३६० अंश माने गये है | इन अंशों के द्वादश भाग और तीस अंश का एक लग्न माना गया है | अथ षोडशवर्गेषु विवृणोमि विवेचनम्, लग्ने देहस्य विज्ञानं होरायां सम्पदादिकम् | द्रेष्काणेे भ्रातृजं सौख्यं तुर्यांशे भाग्यचिन्तनम्, पुत्रपौत्रादिकानां वै चिन्तनं सप्तमांशके || नवमांशे कलत्राणां दशमांशे महत् फलम्, द्वादशांशे तथापित्रोंश्चिन्तनं षोडशांशके | सुखासुखस्य विज्ञानं वाहनानां तथैव च, उपासनासा विज्ञानं साध्यं विंशति भागके || विद्या या वेद वाह्वेशे भांशे चैव बलावलम्, त्रिंशांशके रिष्ट्फलं खवेदांशे शुभाशुभम् | अक्षवेदविभागे च षष्टयंशेऽखिलमीक्षयेत्, यत्र कुत्रापि सम्प्राप्तः क्...

Vasturahasyam - वास्तुरहस्यम् | ARCHITECTURE & IMPORTANT POINTS

वास्तुरहस्यम् - VASTURAHASYAM ARCHITECTURE & IMPORTANT POINTS 🙏 यदि आप शुरू से ही वास्तुकला के बारे में सीखना चाहते हैं तो    वास्तुशास्त्र और महत्त्वपूर्ण विचार   जाएं | | * ↈ वास्तुशास्त्र   के कुछ महत्वपूर्ण   विचारणीय बिन्दु :--- ↈ वास्तुशास्त्र   के अनुसार गृहनिर्माण के समय घर का सीमा चौकोर में रहने से  शकुन महसूस होता है। सर्वप्रथम मन्दिर का स्थान ईशान कोण में या ब्रह्म (बीच) स्थान में, उसके बाद माता-पिता के लिए,उसके बाद रसोई घर, तब अपना कमरा होने से सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। (१)  आप के घर का पानी का बहाव उत्तर दिशा से होनी चाहिये । आपके घर का जो भी पानी निकले उत्तर दिशा से ही  निकले ।तभी बरकत होगा। (२)  आपके भोजन या बैठने का कमरा का दरबाजा उत्तर या पूर्व में होना चाहिये। (३)  आप जब भी दक्षिण मुखी घर या जमीन ले तो बहार के बरामदे पर पश्चिम मुखी दरबाजा बिलकुल नही रखना है नही तो आपके वंश पर असर पड़ेगा । (४)  खिड़की में अर्च या परदा जरुर रखे, मुख्य दरवाजे के उपर भी परदा दे। उससे आप की मान सम्मान,...

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हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)

हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)   हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च |  पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात्  आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है |                     हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है-  अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :-  1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2  फिट ...

36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri

36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri कुण्डली मिलान और विवाह विचार में 36 गुणों की अष्टकूट मिलान सारणी, ग्रह मैत्री, योनि मिलान, वश्य, नाड़ी दोष और भकूट का विचार किया जाता है। यहाँ आपको 36 गुण मिलान सारणी और प्रमुख मिलान चार्ट एक ही स्थान पर मिलेंगे। ⬇ Download 36 Gun Milan PDF & Charts विवाह विचार के प्रमुख चार्ट (Quick Reference Tables) 1. सम्पूर्ण योनि मिलान चार्ट (Full 14 Yoni Table) योनि (Yoni) नक्षत्र (Nakshatras) शत्रु योनि (Enemy - Avoid) अश्व (Horse) अश्विनी, शतभिषा महिष (Buffalo) गज (Elephant) भरणी, रेवती सिंह (Lion) मेष (Ram) कृत्तिका, पुष्य वानर (Monkey) सर्प (Snake) रोहिणी, मृगशिरा नकुल (Mongoose) श्वान (Dog) मूल, आर्द्रा मृग (Deer) मार्जार (Cat) अश्लेषा, पुनर्वसु मूषक (Rat) मूषक (Rat) मघा, पूर्वा फाल्गुनी मार्जार (Cat) गौ (Cow) उत्तरा फाल्गुनी...

10 प्राण और उपप्राण (The 10 Pranas): शरीर में स्थान, कार्य और रहस्य | Dhananjay Pran & Vayu

शरीर के 10 प्राण: स्थान, कार्य और रहस्य (The 10 Pranas) By Astrologer Dr. Sunil Nath Jha (Vedic & Medical Astrologer) उत्तर तथा पश्चिम दिशा के मध्य कोण को वायव्य (North-West) कहते है। इस दिशा का स्वामी या देवता 'वायुदेव' है। वायु पञ्च होते है:- प्राण, अपान, समान, व्यान, और उदान। हर एक मनुष्य के जीवन के लिए पाँचों में एक प्राण परम आवश्यकता होता है। पांचो का शरीर में रहने का स्थान अलग-अलग जगह पर होता है। हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है, उसका नाम ‘प्राण’ (Vital Life Force) है। शरीर में हाथ-पाँव आदि कर्मेन्द्रियां, नेत्र-श्रोत्र आदि ज्ञानेंद्रियाँ तथा अन्य सब अवयव-अंग इस प्राण से ही शक्ति पाकर समस्त कार्यों को करते है। Quick Guide: 5 मुख्य प्राणों के स्थान (Summary Table) प्राण का नाम (Name) स्थान (Location) मुख्य कार्य (Function) 1. प्राण (Prana) नासिका से हृदय तक (Chest area) ...