कुण्डली में षड्वर्ग विचार - Kundli Me Shadvarg Vichaar कुण्डली और षड्वर्ग चक्र का प्रतीकात्मक चित्र ग्रहं होरा च द्रेष्काणो नवांशो द्वादशांशकः | त्रिंशांशश्चेति षड्वर्गास्ते सौम्य ग्रहजाः शुभाः || समस्त ब्रह्माण्ड गोलाकार रुप में विद्यमान है | जिसमें ३६० अंश माने गये है | इन अंशों के द्वादश भाग और तीस अंश का एक लग्न माना गया है | अथ षोडशवर्गेषु विवृणोमि विवेचनम्, लग्ने देहस्य विज्ञानं होरायां सम्पदादिकम् | द्रेष्काणेे भ्रातृजं सौख्यं तुर्यांशे भाग्यचिन्तनम्, पुत्रपौत्रादिकानां वै चिन्तनं सप्तमांशके || नवमांशे कलत्राणां दशमांशे महत् फलम्, द्वादशांशे तथापित्रोंश्चिन्तनं षोडशांशके | सुखासुखस्य विज्ञानं वाहनानां तथैव च, उपासनासा विज्ञानं साध्यं विंशति भागके || विद्या या वेद वाह्वेशे भांशे चैव बलावलम्, त्रिंशांशके रिष्ट्फलं खवेदांशे शुभाशुभम् | अक्षवेदविभागे च षष्टयंशेऽखिलमीक्षयेत्, यत्र कुत्रापि सम्प्राप्तः क्...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...