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नवग्रहों की महादशा का सटीक फलादेश: जानें कौन सा ग्रह चमकाएगा आपकी किस्मत? | गोचर में

गण्ड-मूल (Gand Mool): Janiye Ki Kya Hota Hai Gand Yog in Kundli & Remedies

Top Searches: gand yog in kundli • yog gand kya hota hai • gadant kya hota hai • gand mool kya hota hai • gandmool nakshatra kya hota hai • gand yog meaning in hindi गण्ड-मूल (Gand Mool): Janiye Ki Kya Hota Hai Gand Yog in Kundli | By Astrologer Dr. Sunil Nath Jha इंटरनेट पर अक्सर लोग खोजते हैं: "Yog gand kya hota hai?" या "Gadant kya hota hai?" । क्या आपकी कुण्डली में गण्ड-मूल दोष है? घबराएं नहीं। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Dr. Sunil Nath Jha द्वारा लिखित इस प्रामाणिक लेख में गहराई से समझें कि गण्डान्त (Gadant) और गण्ड मूल नक्षत्र (Gand Mool Nakshatra) क्या होते हैं, इनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है, और वैदिक शास्त्रों में वर्णित इसकी अचूक गण्डान्त शान्ति (Gandmool Shanti) के उपाय क्या हैं। गण्डान्त विचार और जन्म समय (Understanding Gandanta) गण्डान्त विचारन जन्म के लिए अशुभ समय कहा गया है। गण्डान्त योग में जन्म के लिए अशुभ योग कहा गया है | वैसे जो भी योग जातक को प्राप्त होता भोगना ह...

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हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)

हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या)   हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च |  पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात्  आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है |                     हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है-  अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :-  1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2  फिट ...

10 प्राण और उपप्राण (The 10 Pranas): शरीर में स्थान, कार्य और रहस्य | Dhananjay Pran & Vayu

शरीर के 10 प्राण: स्थान, कार्य और रहस्य (The 10 Pranas) By Astrologer Dr. Sunil Nath Jha (Vedic & Medical Astrologer) उत्तर तथा पश्चिम दिशा के मध्य कोण को वायव्य (North-West) कहते है। इस दिशा का स्वामी या देवता 'वायुदेव' है। वायु पञ्च होते है:- प्राण, अपान, समान, व्यान, और उदान। हर एक मनुष्य के जीवन के लिए पाँचों में एक प्राण परम आवश्यकता होता है। पांचो का शरीर में रहने का स्थान अलग-अलग जगह पर होता है। हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है, उसका नाम ‘प्राण’ (Vital Life Force) है। शरीर में हाथ-पाँव आदि कर्मेन्द्रियां, नेत्र-श्रोत्र आदि ज्ञानेंद्रियाँ तथा अन्य सब अवयव-अंग इस प्राण से ही शक्ति पाकर समस्त कार्यों को करते है। Quick Guide: 5 मुख्य प्राणों के स्थान (Summary Table) प्राण का नाम (Name) स्थान (Location) मुख्य कार्य (Function) 1. प्राण (Prana) नासिका से हृदय तक (Chest area) ...

Wealth & Profession Astrology: दशम भाव और धन प्राप्ति के अचूक ज्योतिषीय योग

Wealth & Profession Through Astrology आपका धनागम वा व्यवसाय चुनाव कुण्डली में धन योग और माता लक्ष्मी की कृपा " सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलं अर्थः | वृत्ति मूलं अर्थः अर्थ मूलौ धर्मकामौ || आयुः कर्म च वित्तं विद्या निधनमेव च | पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || धनमाजर्य काकुत्स्थ धन मूल मिदं जगत् | अन्तर ना भी जानाति निर्धनस्य मृत्स्य च || " जातक के व्यवसायों (Profession) के प्रकार का निर्णय ग्रहों की स्वरुप, बल आदि पर निर्भर करता है | जो ग्रह अत्यधिक बलवान् होकर लग्न , लग्नेश आदि आजीविका के द्योत्तक भाव पर प्रभाव डालता है | अतः ग्रहों के स्वरुप का ज्ञान आजीविका के निर्णय करने के लिए अत्यावश्यक है | अतः धन ही कमाना हर कार्य का प्रथम उदेश्य रहता है | जातक का व्यवसाय profession सभी आचार्यों वराह मिहिर, पराशर और कई प्रतिष्ठित विद्वानों ने दशम भाव (10th House) की ओर संकेत किया है | हमारा मत है ...