ज्योतिष और षड्दर्शन भारतीय दर्शन और खगोलीय चेतना का रहस्य — By Dr. S. N. Jha 🔬 विशेष दार्शनिक आलेख | Astrological Philosophy प्रस्तावना: भारतीय वैदिक परम्परा में ६ आस्तिक दर्शन माने गए हैं (न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदान्त, सांख्य और योग)। इस गहन शोध आलेख में डॉ. सुनील नाथ झा ने स्पष्ट किया है कि कैसे ये सभी षड्दर्शन और ज्योतिष शास्त्र का अंतिम लक्ष्य एक ही है—ब्रह्म विद्या और मोक्ष की प्राप्ति। जानिए कैसे ७ ग्रह हमारे बाह्य और आंतरिक व्यक्तित्व को नियंत्रित करते हैं। चित्र १: ज्योतिष एक ब्रह्म विद्या है जो सृष्टि के सूक्ष्मातिसूक्ष्म तत्वों का विश्लेषण करती है। ज्योतिष एक ब्रह्म विद्या है जो अनेकों रूप में विद्यमान है | भारतीय ज्योतिष की विश्लेषणात्मक परिधि का विस्तार इतना है कि उसके अंतर्गत सभी सांसारिक पदार्थोँ का विश्लेषण आ ही जाता है | सभी दर्शनों का प्रतिपादन विषय एक ही है जो सार्वदेशिक और सार्वकालिक है | रस्ते भिन्न होने से भी प्रतिपाद्य विषय एक रह...
मैं सुनील नाथ झा, एक ज्योतिषी, अंकशास्त्री, हस्तरेखा विशेषज्ञ, वास्तुकार और व्याख्याता हूं। मैं 1998 से ज्योतिष, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तुकला की शिक्षा और अभ्यास कर रहा हूं | मैंने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य | मैंने वास्तुकला और ज्योतिष नाम से संबंधित दो पुस्तकें लिखी हैं -जिनके नाम "वास्तुरहस्यम्" और " ज्योतिषतत्त्वविमर्श" हैं | मैंने दो पुस्तकों का संपादन किया है - "संस्कृत व्याकर-सारः" और "ललितासहस्रनाम" |