ज्योतिष और षड्दर्शन भारतीय दर्शन और खगोलीय चेतना का रहस्य — By Dr. S. N. Jha 🔬 विशेष दार्शनिक आलेख | Astrological Philosophy प्रस्तावना: भारतीय वैदिक परम्परा में ६ आस्तिक दर्शन माने गए हैं (न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदान्त, सांख्य और योग)। इस गहन शोध आलेख में डॉ. सुनील नाथ झा ने स्पष्ट किया है कि कैसे ये सभी षड्दर्शन और ज्योतिष शास्त्र का अंतिम लक्ष्य एक ही है—ब्रह्म विद्या और मोक्ष की प्राप्ति। जानिए कैसे ७ ग्रह हमारे बाह्य और आंतरिक व्यक्तित्व को नियंत्रित करते हैं। चित्र १: ज्योतिष एक ब्रह्म विद्या है जो सृष्टि के सूक्ष्मातिसूक्ष्म तत्वों का विश्लेषण करती है। ज्योतिष एक ब्रह्म विद्या है जो अनेकों रूप में विद्यमान है | भारतीय ज्योतिष की विश्लेषणात्मक परिधि का विस्तार इतना है कि उसके अंतर्गत सभी सांसारिक पदार्थोँ का विश्लेषण आ ही जाता है | सभी दर्शनों का प्रतिपादन विषय एक ही है जो सार्वदेशिक और सार्वकालिक है | रस्ते भिन्न होने से भी प्रतिपाद्य विषय एक रह...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...