Kundali Milan & Vivah Vichar 2026: 36 Gun, Graha Maitri Chart & गुण मिलान सारणी
कुण्डली से विवाह विचार By Astrologer Dr. S. N. Jha
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Caption: Kundali Milan & Vivah Vichar Master Graphic - 36 Gun, Nadi Dosh & Remedies | कुंडली से विवाह विचार
अष्ट कूट और अमांगलिक दोष (खराब कुंडली) निवारण –
मांगलिक का अर्थ होता है शुभ। भारतीय संस्कृति और सामाजिक संस्कारों से विवाह संपन्न होने पर वैवाहिक जीवन 90% तक सफल व्यतीत होता है। केवल गणितीय पद्धति (गुण मिलान) से विवाह करने पर आपका वैवाहिक जीवन तभी सफल होगा, जब अष्टकूट मिलान का 10%, नवांश और त्रिशांश मिलान का 80%, और शेष ईश्वरीय शक्ति की 10% कृपा प्राप्त हो। तभी आप एक सफल वैवाहिक जीवन जी पाएंगे।
अष्ट कूट (कुण्डली) मिलान सारणी का महत्व
यह मिलान केवल विवाह के लिए ही नहीं है। मित्रता, व्यवसाय (पार्टनरशिप), नौकर आदि दो लोगों के बीच संबंध देखने के लिए भी किया जाता है कि भविष्य में उनका संबंध कैसा और किस प्रकार चलेगा।
वर्णो वश्यं तथा तारा योनिश्च ग्रह मैत्रकम्।
गणमैत्रं भकूटं च नाड़ी चैते गुणाधिका ।।
कुंडली मिलान में केवल अष्टकूट मिलान ही काफी नहीं है। मंगल दोष भी देखना ज़रूरी है। इसके बाद लग्न, सप्तम भाव, सप्तमेश, सप्तमस्थ ग्रह, सप्तम और सप्तमेश को देख रहे ग्रह, सप्तम भाव का कारक ग्रह और सप्तमेश की युति आदि भी देखी जाती है। विवाह मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है।
इस संस्कार में बंधने से पूर्व वर एवं कन्या के जन्म नामानुसार गुण मिलान करने की परिपाटी है। विवाह पूर्व कुंडली मिलान या गुण मिलान को अष्टकूट मिलान या मेलापक मिलान कहते हैं। इसमें लड़के और लड़की के जन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है।
शास्त्रों में मेलापक के 2 भेद बताए गए हैं— एक ग्रह मेलापक तथा दूसरा नक्षत्र मेलापक। इन दोनों के आधार पर लड़के और लड़की की शिक्षा, चरित्र, भाग्य, आयु तथा प्रजनन क्षमता का आकलन किया जाता है। नक्षत्रों के 'अष्टकूट' तथा 9 ग्रह (परंपरागत) इस रहस्य को व्यक्त करते हैं। अष्टकूट मिलान में वर्ण, वश्य, तारा, योनि, राशीश (ग्रह मैत्री), गण, भकूट और नाड़ी का मिलान किया जाता है। फिर भी, केवल अष्टकूट मिलान ही पर्याप्त नहीं है।
36 Gun Milan Chart (अष्टकूट गुण मिलान सारणी)
| कूट (Koot) | अर्थ (Significance) | अधिकतम गुण (Max Points) |
|---|---|---|
| 1. वर्ण (Varna) | स्वभाव और कार्य क्षमता (Work & Ego) | 1 |
| 2. वश्य (Vashya) | आकर्षण और नियंत्रण (Dominance) | 2 |
| 3. तारा (Tara) | भाग्य और स्वास्थ्य (Destiny) | 3 |
| 4. योनि (Yoni) | शारीरिक और यौन अनुकूलता (Intimacy) | 4 |
| 5. ग्रह मैत्री (Graha Maitri) | मानसिक और वैचारिक तालमेल (Mental) | 5 |
| 6. गण (Gana) | सामाजिक और आध्यात्मिक स्वभाव (Temperament) | 6 |
| 7. भकूट (Bhakoot) | आयु, प्रेम और पारिवारिक सुख (Love & Life) | 7 |
| 8. नाड़ी (Nadi) | शारीरिक ऊर्जा, स्वास्थ्य और संतान (Health & Genes) | 8 |
| कुल 36 गुण (Total Gun) | 36 | |
1. वर्ण - Varna Kya Hota Hai?
वर्ण का अर्थ होता है स्वभाव और रंग। वर्ण चार होते हैं— ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। अपने वर्ण में विवाह करने से जीवन में कष्ट तो आ सकते हैं, परंतु अलगाव नहीं होता। दूसरे वर्ण में विवाह करने से अक्सर देखा जा रहा है कि विवाह संबंध ज्यादा से ज्यादा तीन साल तक ही चल पाता है। परंतु वर्तमान समय में तो लड़के या लड़की की जाति कुछ भी हो, लोग विवाह कर रहे हैं, जिसका प्रभाव जातक स्वयं, परिवार और समाज पर पड़ रहा है। लेकिन उनका स्वभाव और वर्ण उक्त 4 में से 1 ही होगा। कर्क, वृश्चिक और मीन राशियों का वर्ण ब्राह्मण होता है। मेष, सिंह और धनु राशियों का वर्ण क्षत्रिय होता है।
वृष, कन्या और मकर राशियों का वर्ण वैश्य है और मिथुन, तुला, कुंभ राशियां शूद्र वर्ण में आती हैं। वर तथा कन्या के वर्ण से उच्च स्तरीय अथवा समान वर्ण होने पर एक गुण मिलता है। यदि दोनों में से कोई भी मिलान न हो तो शून्य गुण प्राप्त होता है।
यदि वर की राशि का वर्ण कन्या की राशि वर्ण से हीन हो परंतु राशि का स्वामी उत्तम वर्ण का हो, तो वर्ण मिलान शुभ माना जाता है। वर का वर्ण वधू से श्रेष्ठ होने की स्थिति में ही वह अपनी वधू को नियंत्रित करने में तथा मार्गदर्शन करने में सफल हो पाता है। मिलान में इस मानसिक और शारीरिक मेल का बहुत महत्व है। यहां रंग का इतना महत्व नहीं है जितना कि स्वभाव का है।
2. वश्य - Vashya Kya Hota Hai? (Vashya Jalchar / Manav Arth)
वश्य का संबंध भी मूल व्यक्तित्व से है। वश्य पाँच प्रकार के होते हैं— द्विपाद (मानव), चतुष्पाद, कीट, वनचर और जलचर। कुंडली में वश्य से यह जाना जाता है कि जातक के वैवाहिक जीवन में परस्पर कितना प्रेम और आकर्षण होगा। इसमें 12 राशियों को पाँच अलग-अलग भागों में बांटा गया है।
Vashya Chart Table (वश्य जलचर, वनचर, मानव अर्थ)
| वश्य (Vashya) | राशियाँ (Zodiac Signs) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|---|
| जलचर (Water) | कर्क, मीन, मकर (उत्तरार्ध) | Water-dwelling creatures (Emotional) |
| वनचर (Wild) | सिंह | Wild animals (Fierce) |
| मानव / द्विपाद (Human) | मिथुन, कन्या, तुला, धनु (पूर्वार्ध), कुंभ | Two-legged humans (Intellectual) |
| चतुष्पाद (Quadruped) | मेष, वृष, धनु (उत्तरार्ध), मकर (पूर्वार्ध) | Four-legged animals (Grounded) |
| कीट (Insect) | वृश्चिक | Insects (Secretive) |
एक शत्रु और एक भक्ष्य होने पर कोई अंक नहीं मिलता। जिस प्रकार कोई वनचर जल में नहीं रह सकता, उसी प्रकार कोई जलचर जंतु वन में कैसे रह सकता है? इन वश्यों को भी वर्णों की भांति ही श्रेष्ठता से निम्नता का क्रम दिया गया है।
3. तारा - Taara Se Kundli Ka Sambandh
तारा का संबंध दोनों के भाग्य से है। जन्म नक्षत्र से लेकर 27 नक्षत्रों को 9 भागों में बांटकर 9 ताराएं बनाई गई हैं— जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यरि, वध, साधक, मित्र और अमित्र। तारा मिलान तीसरे स्थान पर आता है। इसके अधिकतम तीन अंक होते हैं।
4. योनि - Yoni Kya Hoti Hai?
योनि का संबंध संतान या संभोग से होता है। जिस तरह कोई जलचर का संबंध वनचर से नहीं हो सकता, उसी तरह से ही संबंधों की जांच की जाती है। कुंडली मिलान में योनि मिलान को 4 अंक प्राप्त हैं। इससे जातक के स्वभाव तथा व्यवहार में उसकी योनि की झलक अवश्य दिखाई देती है। नक्षत्रों के आधार पर व्यक्ति की योनि ज्ञात की जाती है। कई योनियाँ एक-दूसरे की परम शत्रु होती हैं। यथा— मार्जार (बिल्ली) और मूषक (चूहा), गौ और व्याघ्र की आपस में शत्रुता है। इनका आपस में कभी भी मेल सही नहीं हो सकता है।
Yoni Milan Chart in Kundali Matching (योनि मिलान सारणी)
| योनि (Yoni) | मित्र योनि (Friendly) | शत्रु योनि (Enemy - Yoni Maitri Dosh) |
|---|---|---|
| अश्व (Ashwa) | गज, सर्प, वानर | महिष (Mahish) |
| गज (Gaja) | अश्व, मेष, मूषक | सिंह (Singh) |
| गौ (Gau) | मृग, नकुल, वानर | व्याघ्र (Vyaghra) |
| मार्जार (Marjar) | मृग, श्वान, वानर | मूषक (Mushak) |
Yoni Milan Chart (योनि मिलान चक्र): This chart helps determine the instinctive and biological compatibility between partners. Use this to check for Yoni Maitri Dosh.
5. राशि या ग्रह मैत्री - Jaaniye Rashi (Maiytri) Ke Baare Mein
Graha Maitri Chart Table (ग्रह मैत्री सारणी)
| ग्रह (Planet) | मित्र (Friendly) | सम (Neutral) | शत्रु (Enemy) |
|---|---|---|---|
| सूर्य (Sun) | चंद्र, मंगल, गुरु | बुध | शुक्र, शनि |
| चंद्र (Moon) | सूर्य, बुध | मंगल, गुरु, शुक्र, शनि | कोई नहीं |
| मंगल (Mars) | सूर्य, चंद्र, गुरु | शुक्र, शनि | बुध |
| बुध (Mercury) | सूर्य, शुक्र | मंगल, गुरु, शनि | चंद्र |
| गुरु (Jupiter) | सूर्य, चंद्र, मंगल | शनि | बुध, शुक्र |
| शुक्र (Venus) | बुध, शनि | मंगल, गुरु | सूर्य, चंद्र |
| शनि (Saturn) | बुध, शुक्र | गुरु | सूर्य, चंद्र, मंगल |
ग्रह मैत्री परस्पर संबंधों को स्पष्ट करती है। राशि का संबंध व्यक्ति के स्वभाव से है। लड़के और लड़कियों की कुंडली में परस्पर राशियों के स्वामियों की मित्रता उनके प्रेमभाव को बढ़ाती है और जीवन को सुखमय और तनावरहित बनाती है। वर तथा वधू की चंद्र राशियों के स्वामी के आपसी मिलान को ग्रह मैत्री कहा जाता है।
6. गण - Gan Kya Hota Hai?
गण का संबंध व्यक्ति की सामाजिक स्थिति को दर्शाता है। गण 3 प्रकार के होते हैं— देव, राक्षस और मनुष्य। गण मिलान में वर तथा कन्या के जन्म नक्षत्र के आधार पर उनके गणों का निर्धारण किया जाता है। इस मिलान को 6 अंक दिए गए हैं।
7. भकूट - Kundli Se Bhakoot Ka Sambandh
भकूट का संबंध जीवन और आयु से होता है। विवाह के बाद दोनों का एक-दूसरे का संग कितना रहेगा, यह भकूट से जाना जाता है। दोनों की कुंडली में राशियों का भौतिक संबंध जीवन को लंबा करता है और दोनों में आपसी संबंध बनाए रखता है।
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8. नाड़ी - Naadi Dosh & Nrudur Dosh
नाड़ी का विचार कफ (आदि या आद्य नाड़ी)— ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद और अश्विनी नक्षत्र की गणना इस नाड़ी में की जाती है। पित्त (मध्य नाड़ी)— पुष्य, मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, भरणी, घनिष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र की गणना मध्य नाड़ी में होती है।
Caption: Vivah Mulank Chart showing marriage compatibility between different Birth Numbers (Mulank 1 to 9) and Planets.
क्या गुण मिलान ही काफी है? (My Analysis by Dr. S.N. Jha)
कुण्डली मिलान गुण आधारित मेलापक की यह विधि पूर्णतया कारगर नहीं है। हमारे अनुसार केवल गुणों की संख्या का कोई विशेष महत्व नहीं है, क्योंकि 28-32 गुण वाले भी विवाह-विच्छेद (तलाक) करते हैं। वहीं 3-7-8 गुण वाले भी अच्छा जीवन जी रहे हैं। अर्थात् मुख्य रूप से स्वभाव का मिलान होना चाहिए।
मेलापक करते या करवाते समय गुणों के अतिरिक्त किन विशेष बातों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है? विवाह का उद्देश्य गृहस्थ आश्रम में पदार्पण के साथ ही वंश वृद्धि और उत्तम दांपत्य सुख प्राप्त करना होता है। सप्तम भाव एवं सप्तमेश, द्वादश भाव एवं द्वादशेश, द्वितीय भाव एवं द्वितीयेश, पंचम भाव एवं पंचमेश, अष्टम भाव एवं अष्टमेश के अतिरिक्त दांपत्य का नैसर्गिक कारक ग्रह शुक्र (पुरुषों के लिए) व गुरु (स्त्रियों के लिए) को देखना सबसे ज़रूरी है।
यथा: यदि सप्तम भाव में मिथुन राशि हो और उसमें सूर्य हों, दशम भाव से शनि सप्तम भाव को देख रहे हों, एकादश भाव में स्थित केतु भी सप्तम को देख रहे हों— तो यह सब एक निश्चित तलाक योग बनाता है। दुनिया की कोई ताकत ऐसे जातक को वैवाहिक सुख नहीं दिला सकती है।
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क्या आपकी कुंडली में विवाह में देरी के योग हैं?
Conclusion: As detailed above, a simple software-based Kundali Milan is never enough. To accurately foresee compatibility, one must analyze Manglik Dosh, Nadi Dosh, the 7th house (Saptam Bhav), Navamsa, and precise planetary conjunctions. Only a deeply calculated assessment can ensure a prosperous marriage.
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Disclaimer: Astrology provides guidance based on planetary positions. Individual results may vary.
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