Janiye Jyotish Ke Baare Mein Ye Vishesh Gyaan ज्योतिष का विशेष ज्ञान — By Astrologer Dr. S. N. Jha यह शरीर इन्द्रिय, सत्व (मन) एवं आत्मा का एक संयोग है। इन तीनो जटिल कारको के स्थूल रूप को ही शरीर कहते है। तथा इनके अदृष्य या सूक्ष्म रूप को आयु कहते है। आयु या दूसरे शब्दों में जीवन के इस शास्त्र को आयुर्वेद या “आयुषो वेदः” कहा गया है। तो जब आयु की कोई सीमा नहीं तो फिर इस शास्त्र की सीमा कैसी? “न ह्यस्ति सुतरामायुर्वेदस्य पारम। तस्मादप्रमत्तः अभियोगे अस्मिन गच्छेत अमित्रस्यापी वचः यशस्यं आयुष्ये श्रोतव्यमनुविधाताव्यम च।” जिन प्राकृतक दृष्यादृष्य कारको तथा पूर्वापर कृत्यों एवं प्रभावों के कारण इस शरीर को आयु के साथ संचलन, विचलन या विराम (मृत्यु) प्राप्त होती है, उसको जिस प्रकाश या ज्योति में दृष्य या जानने पहचानने योग्य ग्रहण किया जा सकता है, उस शास्त्र को ज्योति शास्त्र या “ज्योतिष” कहते है। चित्र १: ज्योतिष शास्त्र शरीर, आत्मा और आयु को समझने का एक दिव्य प्रकाश है। ...
हस्त सामुद्रिक रहस्यम्: सम्पूर्ण हस्त रेखा ज्ञान (ब्रह्म विद्या) हस्त- सामुद्रिक रहस्यम् ब्रह्म विद्या (रेखा) आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च | पञ्चैतान्यापि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः || अर्थात् आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पञ्च गर्भ में ही जातको को विधाता दे देते है | हस्त रेखा विज्ञान का वास्ताविक नाम सामुद्रिक शास्त्र है | इसके दो भेद माने जाते है, उनमे से प्रथम भाग हाथ , अंगुली और हथेली आदि की बनावट है और दूसरा मणिबंध और मस्तक रेखा आदि पर पड़ीं रेखाओं का ज्ञान है | सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुष होते है- अथ शशकादितुर्यपुरुषाणां जीवन चरित्राणि :- 1. शशक पुरुष सुन्दर सुविचार से युक्त ६ फिट से उपर के होते थे, 2. मृग सुडौल सुन्दर सद्विचार से युक्त ६ फिट के होते है, ३ . तुरंग पुरुष माध्यम विचार और सुन्दर ५ /३० के होते है और ४ . बृषभ पुरुष (अधम पुरुष) जो बहुसख्यक सामान्य सकल, अधम विचार वाले ५ - ५ 1/2 फिट ...