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36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri

36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri

36 गुण मिलान सारणी | Kundali Milan, Vivah Vichar & Graha Maitri

कुण्डली से विवाह विचार By Astrologer Dr. S. N. Jha

कुण्डली मिलान और विवाह विचार में 36 गुणों की अष्टकूट मिलान सारणी, ग्रह मैत्री, योनि मिलान, वश्य, नाड़ी दोष और भकूट का विचार किया जाता है। यहाँ आपको 36 गुण मिलान सारणी और प्रमुख मिलान चार्ट एक ही स्थान पर मिलेंगे, साथ ही यह भी समझाया गया है कि केवल गुणों की संख्या के बजाय विवाह-विचार में किन ज्योतिषीय योगों को देखना आवश्यक है।

36 Gun Milan Chart (अष्टकूट गुण मिलान सारणी)

कूट (Koot) अर्थ (Significance) अधिकतम गुण (Max Points)
1. वर्ण (Varna)स्वभाव और कार्य क्षमता (Work & Ego)1
2. वश्य (Vashya)आकर्षण और नियंत्रण (Dominance)2
3. तारा (Tara)भाग्य और स्वास्थ्य (Destiny)3
4. योनि (Yoni)शारीरिक और यौन अनुकूलता (Intimacy)4
5. ग्रह मैत्री (Graha Maitri)मानसिक और वैचारिक तालमेल (Mental Alignment)5
6. गण (Gana)सामाजिक और आध्यात्मिक स्वभाव (Temperament)6
7. भकूट (Bhakoot)आयु, प्रेम और पारिवारिक सुख (Love & Life)7
8. नाड़ी (Nadi)शारीरिक ऊर्जा, स्वास्थ्य और संतान (Health & Genes)8
कुल 36 गुण (Total Gun)36
36 Gun Milan Chart in Hindi (गुण मिलान सारणी) Table Photo

अष्ट कूट और अमांगलिक दोष (खराब कुंडली) निवारण –

मांगलिक का अर्थ होता है शुभ। भारतीय संस्कृति और सामाजिक संस्कारों से विवाह संपन्न होने पर वैवाहिक जीवन 90% तक सफल व्यतीत होता है। केवल गणितीय पद्धति (गुण मिलान) से विवाह करने पर आपका वैवाहिक जीवन तभी सफल होगा, जब अष्टकूट मिलान का 10%, नवांश और त्रिशांश मिलान का 80%, और शेष ईश्वरीय शक्ति की 10% कृपा प्राप्त हो। तभी आप एक सफल वैवाहिक जीवन जी पाएंगे।

अष्ट कूट (कुण्डली) मिलान सारणी का महत्व

यह मिलान केवल विवाह के लिए ही नहीं है। मित्रता, व्यवसाय (पार्टनरशिप), नौकर आदि दो लोगों के बीच संबंध देखने के लिए भी किया जाता है कि भविष्य में उनका संबंध कैसा और किस प्रकार चलेगा।

वर्णो वश्यं तथा तारा योनिश्च ग्रह मैत्रकम्।
गणमैत्रं भकूटं च नाड़ी चैते गुणाधिका ।।

कुंडली मिलान में केवल अष्टकूट मिलान ही काफी नहीं है। मंगल दोष भी देखना ज़रूरी है। इसके बाद लग्न, सप्तम भाव, सप्तमेश, सप्तमस्थ ग्रह, सप्तम और सप्तमेश को देख रहे ग्रह, सप्तम भाव का कारक ग्रह और सप्तमेश की युति आदि भी देखी जाती है। विवाह मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है।

इस संस्कार में बंधने से पूर्व वर एवं कन्या के जन्म नामानुसार गुण मिलान करने की परिपाटी है। विवाह पूर्व कुंडली मिलान या गुण मिलान को अष्टकूट मिलान या मेलापक मिलान कहते हैं। इसमें लड़के और लड़की के जन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है।

36 गुण कैसे मिलते हैं? (Detailed 8 Koot Analysis)

1. वर्ण - Varna Kya Hota Hai?

वर्ण का अर्थ होता है स्वभाव और रंग। वर्ण चार होते हैं— ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। कर्क, वृश्चिक और मीन राशियों का वर्ण ब्राह्मण होता है। मेष, सिंह और धनु राशियों का वर्ण क्षत्रिय होता है। वृष, कन्या और मकर राशियों का वर्ण वैश्य है और मिथुन, तुला, कुंभ राशियां शूद्र वर्ण में आती हैं। वर तथा कन्या के वर्ण से उच्च स्तरीय अथवा समान वर्ण होने पर एक गुण मिलता है।

2. वश्य - Vashya Kya Hota Hai? (Vashya Chart)

वश्य का संबंध भी मूल व्यक्तित्व से है। वश्य पाँच प्रकार के होते हैं— द्विपाद (मानव), चतुष्पाद, कीट, वनचर और जलचर। कुंडली में वश्य से यह जाना जाता है कि जातक के वैवाहिक जीवन में परस्पर कितना प्रेम और आकर्षण होगा।

वश्य (Vashya) राशियाँ (Zodiac Signs) अर्थ (Meaning)
जलचर (Water)कर्क, मीन, मकर (उत्तरार्ध)Emotional & Deep
वनचर (Wild)सिंहFierce & Independent
मानव / द्विपादमिथुन, कन्या, तुला, धनु (पूर्वार्ध), कुंभIntellectual & Social
चतुष्पादमेष, वृष, धनु (उत्तरार्ध), मकर (पूर्वार्ध)Grounded & Practical
कीट (Insect)वृश्चिकSecretive & Intense

3. तारा - Tara Milan

तारा का संबंध दोनों के भाग्य से है। जन्म नक्षत्र से लेकर 27 नक्षत्रों को 9 भागों में बांटकर 9 ताराएं बनाई गई हैं— जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यरि, वध, साधक, मित्र और अमित्र। तारा मिलान को 3 अंक प्राप्त हैं।

4. योनि - Yoni Milan Chart (Full 14 Yoni Table)

योनि का संबंध शारीरिक अनुकूलता, संतान और संभोग से होता है। नक्षत्रों के आधार पर व्यक्ति की योनि ज्ञात की जाती है। कई योनियाँ एक-दूसरे की परम शत्रु होती हैं (योनि मैत्री दोष)। इनका आपस में कभी भी मेल सही नहीं हो सकता।

योनि (Yoni) नक्षत्र (Nakshatras) शत्रु योनि (Enemy - Avoid)
अश्व (Horse)अश्विनी, शतभिषामहिष (Buffalo)
गज (Elephant)भरणी, रेवतीसिंह (Lion)
मेष (Ram)कृत्तिका, पुष्यवानर (Monkey)
सर्प (Snake)रोहिणी, मृगशिरानकुल (Mongoose)
श्वान (Dog)मूल, आर्द्रामृग (Deer)
मार्जार (Cat)अश्लेषा, पुनर्वसुमूषक (Rat)
मूषक (Rat)मघा, पूर्वा फाल्गुनीमार्जार (Cat)
गौ (Cow)उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपदव्याघ्र (Tiger)
महिष (Buffalo)स्वाती, हस्तअश्व (Horse)
व्याघ्र (Tiger)विशाखा, चित्रागौ (Cow)
मृग (Deer)ज्येष्ठा, अनुराधाश्वान (Dog)
वानर (Monkey)पूर्वाषाढ़ा, श्रवणमेष (Ram)
नकुल (Mongoose)उत्तराषाढ़ासर्प (Snake)
सिंह (Lion)धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपदगज (Elephant)

5. ग्रह मैत्री चार्ट | Graha Maitri in Kundali Milan

ग्रह मैत्री परस्पर संबंधों को स्पष्ट करती है। राशि का संबंध व्यक्ति के स्वभाव से है। लड़के और लड़कियों की कुंडली में परस्पर राशियों के स्वामियों की मित्रता उनके प्रेमभाव को बढ़ाती है और मानसिक तालमेल बिठाती है।

ग्रह (Planet) मित्र (Friendly) सम (Neutral) शत्रु (Enemy)
सूर्य (Sun)चंद्र, मंगल, गुरुबुधशुक्र, शनि
चंद्र (Moon)सूर्य, बुधमंगल, गुरु, शुक्र, शनिकोई नहीं
मंगल (Mars)सूर्य, चंद्र, गुरुशुक्र, शनिबुध
बुध (Mercury)सूर्य, शुक्रमंगल, गुरु, शनिचंद्र
गुरु (Jupiter)सूर्य, चंद्र, मंगलशनिबुध, शुक्र
शुक्र (Venus)बुध, शनिमंगल, गुरुसूर्य, चंद्र
शनि (Saturn)बुध, शुक्रगुरुसूर्य, चंद्र, मंगल

6. गण - Gan Kya Hota Hai?

गण का संबंध व्यक्ति की सामाजिक स्थिति को दर्शाता है। गण 3 प्रकार के होते हैं— देव, राक्षस और मनुष्य। गण मिलान में वर तथा कन्या के जन्म नक्षत्र के आधार पर उनके गणों का निर्धारण किया जाता है। इस मिलान को 6 अंक दिए गए हैं।

7. भकूट - Kundli Se Bhakoot Ka Sambandh

भकूट का संबंध जीवन और आयु से होता है। विवाह के बाद दोनों का एक-दूसरे का संग कितना रहेगा, यह भकूट से जाना जाता है। दोनों की कुंडली में राशियों का भौतिक संबंध जीवन को लंबा करता है और दोनों में आपसी संबंध बनाए रखता है।

8. नाड़ी मिलान चार्ट | Nadi Dosh in Kundali

नाड़ी का विचार शारीरिक ऊर्जा और जेनेटिक स्वास्थ्य (संतान) के लिए किया जाता है। नाड़ियाँ 3 प्रकार की होती हैं: आदि (वात), मध्य (पित्त), और अन्त्य (कफ)। यदि वर-वधू दोनों की नाड़ी समान हो, तो 'नाड़ी दोष' लगता है।

नाड़ी (Nadi) प्रकृति (Dosha) नक्षत्र (Nakshatras)
आदि / आद्य (Aadi)वात (Vata)अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद
मध्य (Madhya)पित्त (Pitta)भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद
अन्त्य (Antya)कफ (Kapha)कृत्तिका, रोहिणी, अश्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती

क्या 36 गुण मिलना पर्याप्त है? (My Analysis)

कुण्डली मिलान गुण आधारित मेलापक की यह विधि पूर्णतया कारगर नहीं है। हमारे अनुसार केवल गुणों की संख्या का कोई विशेष महत्व नहीं है, क्योंकि 28-32 गुण वाले भी विवाह-विच्छेद (तलाक) का सामना कर सकते हैं, वहीं 18 गुण से कम वाले भी अच्छा जीवन जी रहे हैं।

मेलापक करते या करवाते समय गुणों के अतिरिक्त किन विशेष बातों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है? विवाह का उद्देश्य गृहस्थ आश्रम में पदार्पण के साथ ही वंश वृद्धि और उत्तम दांपत्य सुख प्राप्त करना होता है। सप्तम भाव एवं सप्तमेश, द्वादश भाव एवं द्वादशेश, द्वितीय भाव एवं द्वितीयेश, पंचम भाव एवं पंचमेश, अष्टम भाव एवं अष्टमेश के अतिरिक्त दांपत्य का नैसर्गिक कारक ग्रह शुक्र (पुरुषों के लिए) व गुरु (स्त्रियों के लिए) को देखना सबसे ज़रूरी है।

यथा: यदि सप्तम भाव में मिथुन राशि हो और उसमें सूर्य हों, दशम भाव से शनि सप्तम भाव को देख रहे हों, एकादश भाव में स्थित केतु भी सप्तम को देख रहे हों— तो यह संयोजन पारंपरिक ज्योतिषीय दृष्टि से वैवाहिक तनाव या विच्छेद की संभावना का प्रबल संकेत माना जा सकता है। केवल अष्टकूट मिलान पर निर्भर रहना उचित नहीं है; नवांश (Navamsa) का विश्लेषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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जैसा कि ऊपर बताया गया है, केवल सॉफ़्टवेयर आधारित गुण मिलान पर्याप्त नहीं है। मंगल दोष, नाड़ी दोष, नवांश और सटीक ग्रह संयोजनों का गहराई से अध्ययन आवश्यक है।

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Disclaimer: Astrology provides guidance based on planetary positions. Individual results may vary.

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